अशोक - ' लालूजी ....दुःख पावोगे

अशोक  - ' लालूजी ....दुःख पावोगे ? '


लालू - ' ना ...दुःख क्यांगो है ?
 मस्सै में चीस चालै जणा काळज्यै में शांति बापरै !! 
और गोडां में तो रीळ चालै ....जणा तो इयां लागै जाणै जेठ गै महिनै में ठंडी शिकंजी ही कंठा में नाख ली है 
खांसी आवै और छाती बाजै जणा इयां लागै कै , मल्हार राग में कोई भजन सुणावै ....
डाक्टर सुई लगावै जणा मीठी मीठी गुदगुदी हुवै !! '



अशोक  - ' ही ही ही ही ....लालूजी थे तो मजाक करो '


लालू - ' बाळुं माजन्यो तेरो ....मजाक शुरू कण करी रै तोतड़ ??
लालूजी दुःख पावो गे ?
बेमार आदमी दुःख ही पावै !!
 और के मजा करै ? '

छंगारो

 छंगारो |

इँ पापी पेट बेई
लिए हाथ मे जेई
एक मोढ़े निसरणी

एक मोढ़े कुल्हाड़ी टाँग गे..!!
पूगै मोट्यार
आथण घरे जद खेलड़ी छाँग गे..!!
.
मनडै माइँ दुःख करयो धिराणी
हालत भरतार गी जाण गे...!!
टंटोळी देगची घी आळी, आटो छाण गे..!!
देगची पड़ी खाली

फेर मिर्च बणाई काचर आळी
ल्याई छावडी पाडोसन उं माँग गे...!!
.
पुग्यो आथण जद जवान
खेलड़ी छाँग गे..!!
.
.
नहीं राशन पुरो घर मैं
करयो प्रबन्ध जीमण गो पल भर मैं
जीमण फेर परोस दियो..!!
मिर्च रोटी और छावडी सयुं
कर धणी सन्तोष लियो...!!

थाळी पर बैठ्यो मेहनती मोट्यारआटो सगळो ओज लियो...!!थक्यो भरतार मांचे पर आडो होयो..!!फिरगी नींद



जियाँ भैंस गो पाडो होयो...!!

सो गई
धिराणी न्यातणो रोट्याँ गो झाड़ गे...!!
आयो जवान आथण 
खेलड़ी छाँग गे...!!

तुम हो मेरे की मैं भी तुम्हारा बनूँ

तुम हो मेरे की मैं भी तुम्हारा बनूँ...!!


कुछ गलतियाँ शामिल है मुझमे
गर हो सके 
मैं दोबारा बनूँ...!!
कोई बन जाये मेरी वजहों से
बजाय इसके
की मैं किसी के द्वारा बनूँ...!!

मंदिर बनूँ
मस्जिद
की चर्च या मैं कोई गुरुद्वारा बनूँ
मजहब कोई बेचारा बनूँ...!!
बेहतर इसके
कभी सूरज
तो कभी चाँद-और-तारा बनूँ...!!

ना किसान जिंदगी से हारा बनूँ
ना फौजी सरहद पे मारा बनूँ
इनको वक्त पे मिल सकूँ
काश मैं वो सहारा बनूँ....!!

मुझ तक पहुंचने से पहलेडूबे कोईना मैं वो किनारा बनूँ....!!सबको जोड़े हुए है जोपुल मैं वो प्यारा बनूँ....!!


ना बनूँ मीठा मैं हद से 
ना शहद से 
मैं एलोवेरा की तरह खारा बनूँ...!!

की हर रोग का इलाज मैं तुम्हारा बनूँ....!!

एक किसान हूँ मैं
करे कोई कोशिश की बेचारा ना बनूँ....!!

कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू त्योहार

यह त्योहार महीने के अंधेरे पखवाड़े के आठवें दिन (अष्टमी) को मनाया जाता है


हिंदू कैलेंडर में भद्रा (अगस्त-स्पितम्बर)। रस लीला, जीवन के नाटकीय विधान
कृष्ण, मथुरा और वृंदावन के क्षेत्रों और क्षेत्रों में एक विशेष विशेषता हैं

मणिपुर में वैष्णववाद के बाद। जबकि रास लीला के चुलबुले पहलुओं को फिर से बनाता है
कृष्ण के युवा दिन, दही हांडी भगवान के चंचल और शरारती पक्ष को मनाते हैं, जहां
नौजवानों की टीमें मक्खन के एक उच्च लटके हुए बर्तन तक पहुंचने और उसे तोड़ने के लिए मानव पिरामिड बनाती हैं।

यह परंपरा, जिसे उड़िया के नाम से भी जाना जाता है, तमिलनाडु में गोकुलाष्टमी पर एक प्रमुख कार्यक्रम है।
जन्म (पुराण)

कृष्ण देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र थे। शास्त्र के विवरण और ज्योतिष के आधार पर
कृष्ण के जन्म की तारीख की गणना, जिसे जन्माष्टमी के रूप में जाना जाता है, 19 जुलाई 3228 ईसा पूर्व और है
3102 ईसा पूर्व पर प्रस्थान किया। कृष्ण मथुरा के यादवों के वृष्णि वंश के थे, और थे
आठवें पुत्र का जन्म राजकुमारी देवकी और उसके पति वासुदेव से हुआ।
मथुरा (वर्तमान मथुरा जिला, उत्तर प्रदेश) यादवों की राजधानी थी, जिसे

कृष्ण के माता-पिता वासुदेव और देवकी के थे। देवकी के भाई राजा कंस का स्वर्गवास हो गया था
अपने पिता, राजा उग्रसेन को कैद करके सिंहासन संभाला। उस भविष्यवाणी से डर गया जिसने उसकी भविष्यवाणी की थी

देवकी के आठवें बेटे के हाथों मौत, कंस ने दंपति को जेल की कोठरी में बंद कर दिया था। बाद
कंस ने पहले छह बच्चों को मार डाला, और देवकी को सातवें (जो था) का स्पष्ट गर्भपात हो गया
वास्तव में शिशु का रोहिणी के रूप में बालराम का गुप्त स्थानांतरण), कृष्ण का जन्म हुआ।

चूंकि वासुदेव को पता था कि कृष्ण का जीवन खतरे में है, कृष्ण को गुप्त रूप से जेल से बाहर ले जाया गया था
सेल अपने पालक माता-पिता, यसोदा और नंदा द्वारा गोकुला (वर्तमान मथुरा में) में उठाए जाने वाले हैं
जिला)। उनके दो अन्य भाई-बहन भी बच गए, बलराम (देवकी के सातवें बच्चे, को स्थानांतरित कर दिया गया
रोहिणी, वासुदेव की पहली पत्नी) और सुभद्रा (वासुदेव और रोहिणी की बेटी) के गर्भ से
बलराम और कृष्ण से बहुत बाद में पैदा हुए)।

हिन्दू जन्माष्टमी को उपवास करके और आधी रात तक जगते हैं, जिस समय कृष्ण हैं
माना जाता है कि पैदा हुए थे। कृष्णा के शैशवावस्था के चित्र झूलों और पालने में रखे गए हैं
मंदिर और घर। आधी रात को भक्ति गीत, नृत्य और के लिए भक्तों की भीड़ इकट्ठा होती है
उपहार बदल लो। कुछ मंदिरों में हिंदू धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी किया जाता है

समारोहभगवद गीता।

दही हांडी को तोड़ने के लिए मानव टॉवर का निर्माण करते हुए गोविंदा पाठक
जय भारत सेवा संघ ने दादर में दही हांडी को तोड़ने के लिए मानव टॉवर का निर्माण किया।

महाराष्ट्र गोविंदा का खेल

जन्माष्टमी / गोकुलाष्टमी, मुंबई और पुणे में दही हांडी के नाम से प्रसिद्ध है
बहुत उत्साह और उत्साह के साथ मनाया गया। हांडी एक मिट्टी का घड़ा है जिसमें छाछ भरी होती है
घटना से पहले एक सुविधाजनक ऊंचाई पर तैनात है। मानव पिरामिड पर सबसे ऊपर का व्यक्ति
एक कुंद वस्तु के साथ मारकर हांडी को तोड़ने की कोशिश करता है। अधिकतर नारियाल (नारियल) पसंद किया जाता है
हिंदू धर्म में पवित्रता, सच्चाई आदि का प्रतीक होना। जब ऐसा होता है तो छाछ को फैला दिया जाता है
संपूर्ण समूह, एकता के माध्यम से उनकी उपलब्धि का प्रतीक है। हाथियों को शहर के चारों ओर स्थापित किया जाता है,
और युवाओं के समूह, जिन्हें गोविंदा पाठक कहा जाता है, ट्रकों में यात्रा करते हैं, जिन्हें तोड़ने की कोशिश की जाती है

दिन के दौरान संभव के रूप में कई हाथ।


इस तरह के कई गोविंदा पाठक एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं, खासकर हाथियों के लिए जो डोलते हैं
भारी पुरस्कार। हाल के दिनों में, घटना ने एक राजनीतिक स्वाद इकट्ठा किया है, और यह आम बात है
राजनीतिक दलों और अमीर समुदाय समूहों को लाखों रुपये की राशि के पुरस्कार प्रदान करने के लिए।
कुछ सबसे प्रसिद्ध हस्तियां दादर, लोअर परेल, वर्ली, मझगाँव, लालबाग, ठाणे में हैं
और बाबू गेनू, पुणे में मंडई।

गोविंदा सैनिकों को भाग लेने के लिए नकद और उपहार दिए जाते हैं; मुंबई में 4,000 से अधिक हस्तियों के लिए,
2,000 गोविंदा सैनिक पुरस्कारों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
मणिपुरी नृत्य शैली में रास लीला।
जन्माष्टमी, लोकप्रिय में जाना जाता है

मणिपुर


कृष्ण जन्म के रूप में मणिपुर, एक महत्वपूर्ण त्योहार है
मणिपुर की राजधानी इंफाल में दो मंदिरों में मनाया जाता है। पहला त्योहार है
गोविंदजी मंदिर और दूसरा कृष्ण चेतना के लिए इंटरनेशनल सोसायटी में है
मंदिर। भगवान कृष्ण के भक्त ज्यादातर इस्कॉन मंदिर में इकट्ठा होते हैं।
स्थानों में

उत्तरी और पूर्वी भारत


कृष्ण के बचपन से जुड़े उत्तर प्रदेश जैसे मथुरा, गोकुल
और वृंदावन पूरे भारत से आगंतुकों को आकर्षित करता है, जो उत्सव में भाग लेने के लिए वहां जाते हैं
समारोह। गुजरात के द्वारका शहर के लोग, जहाँ कृष्ण को माना जाता है
अपने राज्य की स्थापना की, द्वारकाधीश मंदिर जाकर त्यौहार मनाया। जम्मू में,
पतंगबाजी उनके दिन का उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पूर्वी राज्य उड़ीसा में, पुरी के आसपास के क्षेत्र में और पश्चिम बंगाल के नबद्वीप में
जन्माष्टमी व्रत और पूजा मध्यरात्रि तक करें। पुराण प्रवाचन से
भगवत पुराण का 10 वें स्कन्ध से पाठ किया जाता है। इस खंड के अतीत से संबंधित है
भगवान कृष्ण। अगले दिन को नंद उत्सव कहा जाता है या कृष्ण के पालक उत्सव के रूप में मनाया जाता है

इस कड़ी धूप में गेंहू काटते हुए या खेती का


इस कड़ी धूप में गेंहू काटते हुए या खेती का 


अन्य कोई काम करते हुए यही समय मिलता है 

मुझे स्टोरी सोचने का यही वक़्त होता है जब शारीरिक मैं खेती जरूर करता हूँ

 मगर मानसिक तोर पे तैयार करता हूँ आप सब के मनोरंजन के लिए एक और नई स्टोरीउसके डाइलोग उसके पंच


और
आज ये पोस्ट इसलिए क्योंकि आज वाला आइडिया धांसू है 

गिनता हूँ आसमान के तारे


गिनता हूँ आसमान के तारे


बादलों में आकृतियाँ ढूंढता हूँ...!!
.
पढ़ा-लिखा बेरोजगार मैं
अख़बारों में भर्तियां ढूंढता हूँ...!!
.

ये बेरोजगारी जैसे कोई बीमारी
इस बीमारी का मैं इलाज़ कोई शर्तिया 

ढूंढता हूँ...!!
गिनता हूँ आसमान के तारे
बादलों में आकृतियां ढूंढता हूँ.

मैं पूछ्यो - ' यार सगा ....तैं तो माड़ी करी !!

मैं पूछ्यो - ' यार सगा ....तैं तो माड़ी करी !!

 म्हे तो तेरी सांकळ खा खा गे भोड फोड़ लियो , और तुं एन टेम पर खूंटो तुड़ागे भाजग्यो ? '


जणा सगोजी बोल्या -

' के बताऊं सगा !!! 

पचास किलो गा बुंदिया बणवाया ...पांच आदमी ही कोनी धाप्या !!
बेटा बुंदिया खागे बाहर जावै और उल्टी करगे पाछा आ ज्यावै !! '


हिसे सगेगी सांकळ तो के सिरों भी नही खाणो ।



आगू चैतो राख्या

सगा ऐ बुंदिया लोगा ने खुवाई अठ बे बाट कौनी ह
 थे  भँवरलाल का गुर्गा मत समझो । आपकी राजनीति घटिया थी ।
 अब दुबारा प्रयास मत करया ।

मैं चुनाव चुनाव घरे चूल्हो कोनी जगाऊं

मैं चुनाव चुनाव घरे चूल्हो कोनी जगाऊं !!
अपशगुन हुवै ....लोकतंत्र कमजोर हु ज्यावै !!



तो मैं कामरेड गै कार्यालय में गयो ....बठै सौ डेढ़ सौ मोट्यार बैठ्या हा , 
कोई बुंदिया खावै हो ....कोई बीड़ी पीवै हो ....तो कई भाई छोटी छोटी काच गी बोतल लिए बैठ्या ....बेमार लाग्या बेचारा !!


मैं जियां ही पूग्यो और लोगां नै पतों चाल्यो कै - फेसबुक हाळो फाईव स्टार सरपंच आयो है ,
 कोइ लट्ठ लेगे भाज्यो ...तो कोई जूती उठा ली , दो च्यार माई गा लाल तो मांचा लेगे भी मन्नै मारण पड़या !


मैं बोल्यो - ' अरै यारो ....मैं के थारी भैंस खोल ली ? मन्नै क्यों मारो ? '


जणा एक मोट्यार बोल्यो - ' तुं पारीकजी नै तो कांकड़ में दाबगे आग्यो ...अबै म्हारै कामरेड गी बारी है गे ?
दस बारा दिन म्हे होठ मीठा कंठ खारा करां तो तेरै के बळत है ? '




मैं तो हाथ जोड़गे पाछो आग्यो !!

आपस गो प्यार मत खोया भाईयो

 आपस गो प्यार मत खोया भाईयो 

मजाक की सौ बात है ,! 
आपां जकै नेतां खातर लठ बजा देवां ....बै नेता एक टोपी उतार गे दूसरी टोपी पैहरता दो मिनट लगावै !



दस दिन गो त्यौंहार है ...प्यार मोहब्बत स्युं मजा लेवो !
 कोई गै कार्यालय में चाय गी क्वालिटी चोखी है तो बठै चाय पीवो ...कोई जग्यां बुंदिया गोकुल या सौरस घी में बणेड़ा है , बठै होठ मीठा करो ...पामोइल गा बुंदिया खागे मर ना जाया ! पैहली क्वालिटी टेस्ट करो ....अधिकार है आपणों !



आछ्या ....कोई जग्यां थोड़ी क्वालिटी गी शीशी हुवै
 बठै कंठ खारा करो ...कोई पाप कोनी ! हाँ ...देसी थैली चुसावै बीं उम्मीदवार नै साफ़ कह देवो -


' तिस्या कोनी बैठ्या ....काठी राख तेरी दारु , क्वालिटी मेंटेन कर भैया ...नैही बोट कोनी देंवांला '


देसी टेट्रा पैक स्युं लीवर खराब कोनी करणों ....
कम स्युं कम RC या RS  तो हुवणों ही चाहिजै ......हाँ , कोई BP , TEACHERS , OLD MONK , SIGNATURE , VAT69 पावै तो बा आगलै गी बहादुरी है ....बदळै में थेंक्यू या आशीर्वाद भी देवो ।

और बीड़ी ????

बिलकुल !!! अधिकार गै सागै मांगो .....बीड़ी तो चुनाव चुनाव बेसिक और मूलभूत अधिकार गी श्रेणी में आवै !!



देसाई बीड़ी गोरमिंट स्युं मान्यता प्राप्त है और अंतर्देशीय गुणवता मानक स्युं प्रमाणित भी !!
 तो जे कोई उम्मीदवार लोकल बीड़ी पावै तो .....सीधी किशनाराम नाई गी शालीन भाषा में जवाब देवो -


 पावणी है तो देसाई बीड़ी पावो ...नहीं तो थारी .....में दाबल्यो !!



दस दिन गो त्यौंहार चोखी तरियां धोको ....एक दूसरे स्युं होठ मीठा , कंठ खारा पर जाणकारी गो आदान प्रदान भी राखो !

मीराज गा पायलट राफेल नै हाथ मत घालो


भाईयो .....मीराज गा पायलट राफेल नै हाथ मत घालो !!



मन्नै खबर मिली है कै , चुनावां में जका भाई मीराज खांवता .....बै अब कार्यालय में रजनीगन्धा तुलसी मांगै !!

और जका बीड़ी तुल्डता !!! बै सिगरेट गी डिमांड करण लाग रैहया है .....


तो मोट्यारो ....आ गळत बात है !! चुनाव तो दस दिन गा है ....थारा खेत बाड़ा बिक ज्यावैला !

क्योंकै , दस दिन रजनीगन्धा तुलसी खाई ...तो आदत पड़ ज्यावैली , फेर मिराज भावैलो कोनी !

और सिगरेट गी आदत लाग गी तो ??
- तेरे बगैर फॉर स्कावर ....बीड़ी मजा ना देगी !!
पैहली मार्केट में सिगरेट और रजनीगंधा तुलसी गी रेट पतो करल्यो ....बाद में शौक पाळीयो !


इयाँ ना हुज्यावै कै फ़ोकट में शौक  पाळ लेवो और बाद में खेत बाड़ां गी शोकसभा करणी पड़ै !!


कायदे में रैहस्यो - तो फायदे में रैहस्यो !!


तो मीराज गा गैर बदळनीया मीराज गी सीट पर रैहवो ....राफेल थोड़ी हाई फाई है ....एकर लाईसेन्स ले लियो तो बकरी फाटक में आ ज्यावैली !!


कोने का मैं कबाड़ सा

कोने का मैं कबाड़ सा

तुम घर की सजावट सी...!!
10 रूपये की हूँ परेशानी
तू लाख रूपये की राहत सी...!!
पवित्र तू गाय के दूध सी

मैं भेड़ के दूध में भी हो जैसे मिलावट सी...!!
मैं सावन का भी सुखा कोई
तुम सर्दियों में बरसी मावठ सी...!!
उबड़-खाबड़ मैं खद्दर सा

तू रेशम की महीन बुनावट सी...!!


फिर क्यों बात करे चाहत की
बातें मुझे ये तेरी लगती है दिखावट सी...

ओ डिसीजन चोखो है या माड़ो है ....मन्नै पतो कोनी

ओ डिसीजन चोखो है या माड़ो है ....मन्नै पतो कोनी मास्टरजी कोई टाबर गै लात लाठी गी मारै जणा आ कोनी सोचै कै , इं लात लाठी गा दूरगामी परिणाम के ह...