कभी परिस्थितियों के हाथों की कठपुतली ना बनें

कभी परिस्थितियों के हाथों की कठपुतली ना बनें, क्योंकि आप हालात बदलने का दम रखते हैं।

आदमी को हमेशा महेनत करते रहना चाहिए और कभी परिस्थितियों

 के हाथों की कठपुतली नहीं बनाना चाहिए क्योकि ऐसे बैठे बैठे हमे कोई कुछ

 देने वाला नहीं है इसीलिए हमे निरंतर काम पर लगे रहना जरुरी है 

क्युकी आप हालात बदलने का दम रखते हो 
जस्साराम की कलम से 

रंगों का अपना प्रभाव होता है।

रंगों का अपना प्रभाव होता है।



 फलों और सब्जियों में पाए जाने वाले विटामिन, खनिज और 
अन्य पोषक तत्व शरीर में हानिकारक पदार्थों के दुष्प्रभावों को कम करते हैं। 
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एंटीऑक्सिडेंट मल्टीकोल युक्त खाद्य पदार्थों में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। 

रंगों का प्रभाव हमारे जीवन में शुरू से रहा है,
 चाहे वह मानव रूप हो, रक्त हो, बाल हों या पोशाक, सभी का अपना प्रभाव है।
 यदि यह कहा जाए कि रंगों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है, 

तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। 
यह अब तक किए गए कई शोधों से भी स्पष्ट है।
 अब कई शोधों ने भी साबित कर दिया है कि फलों और सब्जियों में मौजूद रंग हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद और फायदेमंद होते हैं।

मनुष्यों पर दुष्प्रभाव को कम करें



 सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।
 लेकिन लगभग सभी आहार विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि आहार में अधिक प्राकृतिक बहुरंगी खाद्य पदार्थों के समावेश से स्वास्थ्य में सुधार होता है
 आहार विशेषज्ञ कहते हैं कि हर रंग के खाद्य पदार्थों में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं।

गांव में मचा कोहराम

गांव में मचा कोहराम 


में गांव के चौक में खेल रहा था तभी अचनाक एक शेर आया और गांव में कोहराम मच गया सभी लोग इधर उधर भागने लगे मेने देखा की वो शेर मेरी तरफ की देख रहा था में उस शेर को देखकर दर गया और घर की तरफ 

भागने लगा तभी देखा की शेर झट से मेरे पास आ गया मेरे गांव में मेरे मामाजी आये हुए थे मामाजी को जब शेर को आते हुआ देखा तो मामाजी ने एक बड़ा डंडा लेकर मेरे पास आ गए और शेर की तरफ डोरे और शेर को वह से भगाया और में सुरक्षित बच गया और में और मेरे मामाजी घर की और चल दिए में बहुत खुस था जैसे तैसे में 

अपने घर पहुंचा वो शेर गांव में इधर उधर भाग रहा था सभी लोग सहमे हुए थे की अब करे तो क्या करे शभी 


लोग बातें क्र रहे थे की अब हमे वन विभाग के कर्मचारियों को बताना चाहिए तभी वह से किसी एक आदमी ने फोन करके वन विभाग के कर्मचारियों को वह बुलाया और वः लोग एक बड़ा पिजरा लेकर आये और शेर को 

पकड़कर वह से चल दिए इस प्रकार उस शेर से सभी को मुक्ति मिली और सभी लोग खुस थे अगर हमारी पोस्ट अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करे जस्साराम की कलम से 

ओ डिसीजन चोखो है या माड़ो है ....मन्नै पतो कोनी

ओ डिसीजन चोखो है या माड़ो है ....मन्नै पतो कोनी मास्टरजी कोई टाबर गै लात लाठी गी मारै जणा आ कोनी सोचै कै , इं लात लाठी गा दूरगामी परिणाम के ह...