कोने का मैं कबाड़ सा
तुम घर की सजावट सी...!!
10 रूपये की हूँ परेशानी
तू लाख रूपये की राहत सी...!!
पवित्र तू गाय के दूध सी
मैं भेड़ के दूध में भी हो जैसे मिलावट सी...!!
मैं सावन का भी सुखा कोई
तुम सर्दियों में बरसी मावठ सी...!!
उबड़-खाबड़ मैं खद्दर सा
तू रेशम की महीन बुनावट सी...!!
फिर क्यों बात करे चाहत की
बातें मुझे ये तेरी लगती है दिखावट सी...
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