वक्त और रिश्तों ने सिखा दी होशियारी

वक्त और रिश्तों ने सिखा दी होशियारी 

वरना हम भी मासूमियत की हद तक मासूम थे।”

में बिलकुल सीधा आदमी था मुझे सभी अपने ही लगते थे और अच्छे भी

 लकिन वक्त और रिश्तों ने सिखा दी होशियारी जिससे की में अपनों पैरो पर खड़ा रहना शिख गया 


जस्साराम की कलम से 

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