जब मैं दूसरी क्लास पढ़ता था
में स्कूल में दूसरी क्लास में पढ़ता था बात उस समय की है बहुत सारे लड़के थे मेरी सभी लडको से अच्छी बनती थी और सभी लड़के मुझसे बहुत ज्यादा प्यार करते थे और सभी टीचर भी में पढाई में ज्यादा होसियार था सभी लड़के मुझसे पर्सन पूछते है और में सभी का जवाब बड़ी आसानी से देता था क्युकी की में बहुत ही मेहनती
लड़का हु इसीलिए मेरे साथ अच्छा व्यवहार करते थे लड़को की लाइन में लगना मुझे अच्छा नहीं लगता था और ना ही किसी से बिना फालतू बात करना पसंद नहीं है मुझे सिर्फ पढाई में ध्यान देता हु बाकि सभी लड़के जागृलु पारवती के लड़के थे क्युकी उन्हें किसी पढाई से कोई मतलब नहीं है वो सिर्फ टाइम पास करने के लिए आते थे
ऐसे में मुझे वो ज्यादा अच्छे नहीं लगते थे क्युकी फालतू लोगो से बहस करने से कोई मतलब नहीं है इससे तो अच्छा है हम अपने काम पर धयान दे लकिन जो लड़के बदमाश होते है उनके लिए और कोई काम नहीं होता है वो सिर्फ उन्ही चीजों का ध्यान रखते है तो ये सब बाटे मायने नहीं रखती की कौन क्या करता है क्योकि कोई
पढाई किसी के कहने से नहीं होती वो तो अलग अलग दिमाग होता है वो बात उन लडको के साथ हुए थी और उन्हें सिर्फ बाकि चीजों से मतलब था ने की पढाई से इस प्रकार सभी लडको से परेशान था लकिन में किसी से
कोई मतलब नहीं रखता था में सिर्फ पढाई में धयान रखता था इस प्रकार मेरी दूसरी क्लास की दास्ताँ थी
जस्साराम की कलम से
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