दिल में बुराई रखने से बेहतर है कि नाराज़गी ज़ाहिर कर दीजिए।

दिल में बुराई रखने से बेहतर है कि नाराज़गी ज़ाहिर कर दीजिए।

आदमी को किसी की दिल में बुराई नहीं करनी चाहिए अगर बुराई है

 तो आप नाराज़गी ज़ाहिर कर दीजिए जिससे की आपका मन हल्का हो जायेगा

 और आपके मन से बुरे विचार ख़तम हो जायेंगे


 जस्साराम की कलम से 

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