आधा रास्ता चलकर वापिस लौटने की कभी ना सोचो

आधा रास्ता चलकर वापिस लौटने की कभी ना सोचो,


 क्योंकि आपको लौटने के लिए भी उतनी ही राह तय करनी है जितनी मंज़िल तक जाने ले लिए।

आदमी को हमेशा लम्बी सोच रखनी चाहिए किसी लक्ष्य तक जाने के के आधा 

रास्ता पार करने के बाद वापिस लौटने की कभी मत सोचो क्योकि उससे कोई फायदा नहीं

 मिलने वाला है इससे बहतर यही होगा की हम आगे बढ़े हम उतना ही वक़्त लगेगा 


अपने लक्ष्य तक जाने के लिए 

जस्साराम की कलम से 

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